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नामकरण संस्कार मुहूर्त 2019

Last Updated: 11/13/2018 2:09:50 PM

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नामकरण संस्कार के लिए साल 2019 में कौन सा दिन रहेगा लिए सबसे ज्यादा शुभ, इस बारे आज हम आपको जानकारी दे रहे हैं। आधुनिकता के इस दौर में आजकल बच्चों के नाम ऐसे रखे जाने लगे हैं कि उनका अर्थ बच्चों के माता-पिता से ही पूछना पड़ता है। माता-पिता अब देश-काल की सीमाओं से परे जाकर अपने बच्चों के लिए कुछ ऐसे नाम तलाशना चाहते हैं, जो बिलकुल ही अलग और ख़ास हो। कई बच्चों के नाम उनके माता-पिता के नाम के पहले अक्षरों को मिलाकर रखे जाने का आजकल एक ट्रेंड चल पड़ा है। नाम कैसा भी हो, वह एक ऐसी पहचान है, जो मृत्यु तक हमसे जुड़ी रहती है। इसलिए नाम रखते हुए सावधानी रखनी चाहिए और सोच-समझ कर ही नाम का चयन करना चाहिए।

नामकरण संस्कार

नामकरण संस्कार मुहूर्त 2019
दिनाँक दिन तिथि नक्षत्र समय
02 जनवरी 2019 बुधवार द्वादशी विशाखा नक्षत्र में 09:39 - 18:28
03 जनवरी 2019 गुरुवार त्रयोदशी अनुराधा नक्षत्र में 07:15 - 11:03
07 जनवरी 2019 सोमवार प्रतिपदा उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में 07:15 - 18:09
09 जनवरी 2019 बुधवार तृतीया ध। निष्ठा नक्षत्र में 07:15 - 14:38
18 जनवरी 2019 शुक्रवार द्वादशी रोहिणी नक्षत्र में 07:15 - 19:26
21 जनवरी 2019 सोमवार पूर्णिमा पुष्य नक्षत्र में 10:46 - 19:34
25 जनवरी 2019 शुक्रवार पंचमी उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में 07:13 - 18:18
30 जनवरी 2019 बुधवार दशमी अनुराधा नक्षत्र में 15:33 - 16:40
06 फरवरी 2019 बुधवार द्वितीया धनिष्ठा नक्षत्र में 07:07 - 09:53
07 फरवरी 2019 गुरुवार द्वितीया शतभिषा नक्षत्र में 07:06 - 12:09
11 फरवरी 2019 सोमवार षष्ठी अश्विनी नक्षत्र में 07:03 - 18:12
15 फरवरी 2019 शुक्रवार दशमी मृगशिरा नक्षत्र में 07:27 - 20:13
21 फरवरी 2019 गुरुवार द्वितीया उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में 06:55 - 19:50
04 मार्च 2019 सोमवार तृतीया श्रवण नक्षत्र में 06:44 - 16:29
08 मार्च 2019 शुक्रवार द्वितीया उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में 06:40 - 18:51
13 मार्च 2019 बुधवार सप्तमी रोहिणी नक्षत्र में 06:34 - 18:31
21 मार्च 2019 गुरुवार पूर्णिमा उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में 07:13 - 20:16
22 मार्च 2019 शुक्रवार द्वितीया हस्त नक्षत्र में 06:24 - 20:12
25 मार्च 2019 सोमवार पंचमी विशाखा नक्षत्र में 07:03 - 20:00
01 अप्रैल 2019 सोमवार द्वितीया धनिष्ठा नक्षत्र में 06:12 - 19:23
05 अप्रैल 2019 शुक्रवार पूर्णिमा रेवती नक्षत्र में 14:20 - 19:17
10 अप्रैल 2019 बुधवार पंचमी रोहिणी नक्षत्र में 06:02 - 18:57
11 अप्रैल 2019 गुरुवार षष्ठी मृगशिरा नक्षत्र में 06:01 - 10:25
12 अप्रैल 2019 शुक्रवार सप्तमी आर्द्रा नक्षत्र में 09:54 - 13:24
17 अप्रैल 2019 बुधवार त्रयोदशी उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में 05:54 - 18:31
19 अप्रैल 2019 शुक्रवार पूर्णिमा चित्रा नक्षत्र में 16:42 - 19:29
26 अप्रैल 2019 शुक्रवार सप्तमी उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में 05:45 - 14:40
29 अप्रैल 2019 सोमवार दशमी शतभिषा नक्षत्र में 05:43 - 08:51
02 मई 2019 गुरुवार त्रयोदशी उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में 06:42 - 19:50
06 मई 2019 सोमवार द्वितीया कृतिका नक्षत्र में 16:36 - 19:34
09 मई 2019 गुरुवार पंचमी आर्द्रा नक्षत्र में 15:17 - 19:00
10 मई 2019 शुक्रवार षष्ठी पुनर्वसु नक्षत्र में 05:34 - 19:06
15 मई 2019 बुधवार एकादशी उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में 10:36 - 21:18
16 मई 2019 गुरुवार द्वादशी हस्त नक्षत्र में 05:30 - 19:08
23 मई 2019 गुरुवार पंचमी उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में 05:27 - 20:46
24 मई 2019 शुक्रवार षष्ठी उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में 05:26 - 20:42
29 मई 2019 बुधवार दशमी उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में 15:21 - 20:23
30 मई 2019 गुरुवार एकादशी रेवती नक्षत्र में 05:24 - 20:19
31 मई 2019 शुक्रवार द्वादशी अश्विनी नक्षत्र में 05:24 - 20:15
03 जून 2019 सोमवार पूर्णिमा रोहिणी नक्षत्र में 15:32 - 20:03
06 जून 2019 गुरुवार तृतीया पुनर्वसु नक्षत्र में 05:23 - 09:55
07 जून 2019 शुक्रवार चतुर्थी पुष्य नक्षत्र में 07:38 - 18:56
12 जून 2019 बुधवार दशमी हस्त नक्षत्र में 06:06 - 19:28
13 जून 2019 गुरुवार एकादशी चित्रा नक्षत्र में 16:49 - 19:24
14 जून 2019 शुक्रवार द्वादशी स्वाति नक्षत्र में 05:23 - 10:16
19 जून 2019 बुधवार द्वितीया पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में 13:29 - 19:59
27 जून 2019 गुरुवार नवमी रेवती नक्षत्र में 05:44 - 18:15
28 जून 2019 शुक्रवार दशमी अश्विनी नक्षत्र में 06:36 - 09:11
03 जुलाई 2019 बुधवार प्रतिपदा आर्द्रा नक्षत्र में 06:36 - 20:09
04 जुलाई 2019 गुरुवार द्वितीया पुष्य नक्षत्र में 05:28 - 20:05
08 जुलाई 2019 सोमवार षष्ठी उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में 05:30 - 15:26
11 जुलाई 2019 गुरुवार दशमी स्वाति नक्षत्र में 05:31 - 15:55
18 जुलाई 2019 गुरुवार द्वितीया श्रवण नक्षत्र में 05:35 - 20:52
19 जुलाई 2019 शुक्रवार द्वितीया धनिष्ठा नक्षत्र में 05:35 - 20:03
22 जुलाई 2019 सोमवार पंचमी पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में 10:24 - 20:37
24 जुलाई 2019 बुधवार सप्तमी रेवती नक्षत्र में 05:38 - 18:05
29 जुलाई 2019 सोमवार द्वादशी मृगशिरा नक्षत्र में 08:00 - 18:22
01 अगस्त 2019 गुरुवार पूर्णिमा पुष्य नक्षत्र में 08:42 - 12:11
05 अगस्त 2019 सोमवार पंचमी हस्त नक्षत्र में 05:45 - 19:42
07 अगस्त 2019 बुधवार सप्तमी स्वाति नक्षत्र में 05:46 - 11:41
09 अगस्त 2019 शुक्रवार नवमी अनुराधा नक्षत्र में 10:00 - 19:26
15 अगस्त 2019 गुरुवार पूर्णिमा श्रवण नक्षत्र में 17:59 - 19:02
16 अगस्त 2019 शुक्रवार प्रतिपदा धनिष्ठा नक्षत्र में 05:51 - 20:22
21 अगस्त 2019 बुधवार पंचमी अश्विनी नक्षत्र में 05:53 - 20:06
28 अगस्त 2019 बुधवार त्रयोदशी पुष्य नक्षत्र में 06:10 - 19:39
09 सितंबर 2019 सोमवार एकादशी पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में 08:36 - 11:33
11 सितंबर 2019 बुधवार त्रयोदशी श्रवण नक्षत्र में 06:04 - 18:36
16 सितंबर 2019 सोमवार द्वितीया रेवती नक्षत्र में 06:06 - 19:49
20 सितंबर 2019 शुक्रवार षष्ठी कृतिका नक्षत्र में 10:19 - 19:33
25 सितंबर 2019 बुधवार एकादशी पुष्य नक्षत्र में 06:11 - 08:53
30 सितंबर 2019 सोमवार द्वितीया चित्रा नक्षत्र में 06:13 - 12:08
02 अक्टूबर 2019 बुधवार चतुर्थी विशाखा नक्षत्र में 12:52 - 18:46
03 अक्टूबर 2019 गुरुवार पंचमी अनुराधा नक्षत्र में 06:15 - 12:10
07 अक्टूबर 2019 सोमवार नवमी उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में 12:38 - 18:26
09 अक्टूबर 2019 बुधवार एकादशी धनिष्ठा नक्षत्र में 17:19 - 18:18
10 अक्टूबर 2019 गुरुवार द्वादशी शतभिषा नक्षत्र में 06:19 - 18:14
14 अक्टूबर 2019 सोमवार प्रतिपदा रेवती नक्षत्र में 06:21 - 17:59
18 अक्टूबर 2019 शुक्रवार चतुर्थी रोहिणी नक्षत्र में 07:29 - 19:18
21 अक्टूबर 2019 सोमवार सप्तमी पुनर्वसु नक्षत्र में 06:26 - 06:44
25 अक्टूबर 2019 शुक्रवार द्वादशी पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में 11:00 - 18:51
28 अक्टूबर 2019 सोमवार पूर्णिमा स्वाति नक्षत्र में 09:08 - 18:26
30 अक्टूबर 2019 बुधवार तृतीया अनुराधा नक्षत्र में 06:32 - 18:31
06 नवंबर 2019 बुधवार दशमी शतभिषा नक्षत्र में 07:21 - 18:04
07 नवंबर 2019 गुरुवार एकादशी शतभिषा नक्षत्र में 06:37 - 08:41
08 नवंबर 2019 शुक्रवार एकादशी पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में 12:24 - 17:56
14 नवंबर 2019 गुरुवार द्वितीया रोहिणी नक्षत्र में 06:43 - 17:32
15 नवंबर 2019 शुक्रवार तृतीया मृगशिरा नक्षत्र में 06:44 - 07:53
18 नवंबर 2019 सोमवार षष्ठी पुष्य नक्षत्र में 06:46 - 17:10
22 नवंबर 2019 शुक्रवार दशमी उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में 09:01 - 18:56
27 नवंबर 2019 बुधवार प्रतिपदा अनुराधा नक्षत्र में 06:53 - 08:12
02 दिसंबर 2019 सोमवार षष्ठी श्रवण नक्षत्र में 06:57 - 18:17
06 दिसंबर 2019 शुक्रवार दशमी उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में 07:00 - 16:30
12 दिसंबर 2019 गुरुवार पूर्णिमा मृगशिरा नक्षत्र में 10:42 - 17:37
27 दिसंबर 2019 शुक्रवार प्रतिपदा पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में 17:30 - 18:53
30 दिसंबर 2019 सोमवार चतुर्थी धनिष्ठा नक्षत्र में 13:55 - 18:41

नामकरण संस्कार की आवश्यक !

नामकरण संस्कार सभी संस्कारों में से एक बेहद महत्वपूर्ण संस्कार माना जाता है। इस दुनिया में हर किसी की पहचान उसके नाम से ही होती है इसलिए बच्चे के जन्म लेने के बाद उसे एक ख़ास पहचान देने के लिए एक नाम रखा जाता है। इसी नाम को विधिवत रखने की प्रक्रिया को नामकरण संस्कार कहा जाता है। कुछ स्थानों पर नामकरण संस्कार को 'छठी' भी कहा जाता है। संसार के हर धर्म, समुदाय में बच्चों के नाम रखने के तरीके अलग जरूर हैं लेकिन इसका पालन सभी करते हैं। हिन्दू धर्म पूरी तरह से वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित है जिसका प्रमाण समय-समय पर मिलता रहता है। हिन्दू धर्म के सोलह संस्कारों में से हर संस्कार अपने आप में अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि हर संस्कार में जीवन के हर चरण को ध्यान में रखते हुए कुछ निश्चित नियम बताएं गए हैं, जिनका पालन करना हमारे जीवन को हर संभव तरीके से बेहतर और उन्नत बनाता है। ऐसा ही एक महत्वपूर्ण संस्कार है नामकरण जिसका पालन सभी को विशेष रूप से करना चाहिए।

नामकरण मुहूर्त का महत्व

हिन्दू धर्म के अनुसार ये माना गया है कि सभी शुभ कामों को यदि शुभ मुहूर्त में किया जाए तो उनके सफल होने और उनसे अधिकाधिक लाभ प्राप्त होने की संभावना बढ़ जाती है। बच्चे के जन्म के बाद उसका नाम रखना भी एक शुभ कार्य है इसलिए नामकरण संस्कार के लिए भी शुभ मुहूर्त का होना आवश्यक माना जाता है। शुभ मुहूर्त निकालने के लिए तिथि, वार, ग्रह ,नक्षत्र आदि की गणना की जाती है। आमतौर पर नामकरण संस्कार बच्चे के जन्म के 11वें दिन सूतक हट जाने के बाद करवाने की प्रथा है। इस संस्कार को सम्पन्न करवाने के लिए मुहूर्त किसी योग्य अनुभवी ज्योतिषी से ही निकलवाना चाहिए।

नामकरण संस्कार का ज्योतिषीय महत्व?

शास्त्रों अनुसार नाम रखना एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है, नाम का बच्चे के जीवन पर काफी प्रभाव पड़ता है, इसलिए नाम सही और बहुत सोच समझकर ही रखा जाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि नाम का असर व्यक्ति के व्यक्तित्व और उसके गुणों पर भी पड़ता है और यह बात एक सीमा तक सच भी है। आजकल माता पिता अपनी या अपने प्रियजनों की मर्ज़ी से कुछ भी नाम बच्चे के लिए चुन लेते हैं, लेकिन वास्तव में यह सही नहीं है। हिन्दू धर्म में नाम रखने की एक विधिवत प्रक्रिया है, जिसे अपनाना चाहिए। इस प्रक्रिया के अनुसार बच्चे के दो नाम रखे जाते हैं, एक गुप्त नाम होता है, जो केवल बच्चे के माता-पिता को ही मालूम होता है और दूसरा प्रचलित नाम, जिससे आमतौर पर बच्चे को समाज में पहचान मिलती है।

गुप्त नाम रखने के पीछे आशय यह होता है कि बच्चे के उस नाम को आधार बनाकर ही तंत्रक्रियाओं से उसकी रक्षा की जा सके। इसके साथ ही विवाह आदि के समय भी गुप्त नाम की बेहद महत्वपूर्ण आवश्यकता पड़ती है, जिसे ग्रह, नक्षत्र, दिन, वार ,समय आदि का सूक्ष्म और सटीक आकलन करने के बाद ही निकाला जाता है। दूसरे प्रचलित नाम पर ऐसी क्रियाओं का असर नहीं होता क्योंकि वह सटीक गणना करके रखा गया नाम नहीं होता, इसलिए हिन्दू धर्म में दो नाम रखने का प्रावधान है। जिस नक्षत्र में बच्चे का जन्म होता है, बच्चे का नाम भी उसी नक्षत्र के आधार पर ही रखा जाता है। मान्यता है कि नामकरण संस्कार से बच्चे की आयु और उसका तेज बढ़ता है।

नामकरण संस्कार के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

  • बच्चे का नाम अर्थपूर्ण और सरल ही रखें, ताकि बच्चे के नाम का उच्चारण सभी आसानी से कर सकें और नाम बिगड़ें नहीं।
  • बच्चे का नामकरण संस्कार किसी अनुभवी और सुयोग्य ज्योतिषी से ही करवाएं।
  • बच्चे का नामकरण करवाते समय उसके जन्म का समय, दिन, नक्षत्र और ग्रह स्थिति आदि का सही और सटीक आकलन होना चाहिए।
  • बच्चे का नाम रखने के लिए यदि उचित अक्षर नहीं आये तो नक्षत्र राशि के बाकी अक्षरों से नाम निकालना चाहिए।
  • जहाँ तक संभव हो, नामकरण संस्कार घर पर ही करवाएं, घर के अलावा इसे मंदिर, प्रज्ञा संस्थान और यज्ञ स्थल पर भी करवाया जा सकता है।
  • नामकरण संस्कार रविवार, सोमवार, बुधवार, बृहस्पतिवार के दिन, स्थिर लग्न एवं नक्षत्र चरण के आधार पर कराना उचित होता है।
  • रिक्ता तिथि को नामकरण संस्कार नहीं करवाना चाहिए।
  • बच्चे का नामकरण घर के बड़े-बुजुर्गों के नाम पर ना करें, ऐसा इसलिए क्योंकि बच्चे को जब भी उस नाम से पुकारा जाएगा, तो अच्छा नहीं लगेगा, क्योंकि भारतीय समाज में बड़े- बुजुर्गों का नाम लेने की परम्परा नहीं है।
  • आजकल नवजात शिशु के नाम रखने का भी प्रचलन है, लेकिन बच्चे का नाम रखने का काम पंडित जी द्वारा बताये गए अक्षर से, यथासंभव माता-पिता के द्वारा रखना ही सही होता है।
  • बच्चे के दो-तीन नाम रखने के बजाय एक ही नाम रखने का प्रयास करें।
  • बच्चों के नाम ऐसे भी ना रखें कि उससे बालक या बालिका का भेद ही ना पता चले। हर नाम अपने आप में महत्वपूर्ण और सुंदर होता है। नाम से व्यक्ति की भावनाएं भी जुड़ीं होती हैं, इसलिए सार्थक और सुंदर नाम चुनें।
  • विदेशी नामों की अपेक्षा हिंदी नामों को प्राथमिकता दें। हालांकि हर भाषा में नाम और उनके अर्थ अच्छे हैं, लेकिन यदि अपनी भाषा में नाम रखा जाए तो उससे जुड़ाव ज्यादा महसूस होता है।

हमें उम्मीद है कि इस लेख के जरिये आपको नामकरण संस्कार मुहूर्त के बारे में विस्तार से जानकारी मिल गयी होगी!

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