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पूर्णिमा 2022 कैलेंडर | Purnima 2022 Tithi

Last Updated: 9/20/2021 5:17:19 PM

एस्ट्रोकैंप द्वारा पूर्णिमा 2022 कैलेंडर (Purnima 2022 Calendar) के माध्यम से आपको आने वाली पूर्णिमा 2022 तिथियों के सूची की जानकारी मिलेगी। हिन्दू पंचांग के अनुसार जानिये इस नववर्ष 2022 में पूर्णिमा तिथियों का महत्व और जानिये उनसे जुड़े कुछ सवालों के जवाब। हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने की शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि को पूर्णिमा कहा जाता है। जहाँ अमावस्या के दिन चंद्रमा पूरी तरह से गायब होता है वहीं पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपने पूर्ण रूप में नजर आता है। अमावस्या तिथि की ही तरह पूर्णिमा तिथि पर भी हिंदू धर्म में कोई ना कोई व्रत और त्योहार अवश्य पड़ता है।

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हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन दान पुण्य और व्रत करना विशेष फलदाई साबित होता है। यही वजह है कि, पूर्णिमा तिथि के दिन बहुत से लोग तीर्थ स्थलों के दर्शन करने जाते हैं, पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और अपनी यथाशक्ति के अनुसार दान पुण्य करते हैं। साल में पड़ने वाली कार्तिक पूर्णिमा, वैशाख पूर्णिमा और माघ पूर्णिमा बेहद ही शुभ मानी जाती है। पूर्णिमा तिथि के दिन चंद्रमा की पूजा का विधान बताया गया है।

पूर्णिमा के दिन बहुत से लोग भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, उनके लिए व्रत रखते हैं, उनकी कथा सुनते हैं और दूसरों को सुनाते हैं। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद पूजा आदि में ध्यान लगाना, मुमकिन हो तो व्रत करना बेहद ही शुभ होता है। पूर्णिमा के दिन दो बार पूजा की जाती है एक तो सुबह के समय और दूसरा शाम के समय जब चंद्रमा अपने चरम पर होता है। कहा जाता है इस दौरान इंसान के अंदर पूरी तरह से सकारात्मक ऊर्जा होती है और ऐसे में इस दौरान की गई पूजा का श्रेष्ठ फल व्यक्ति को प्राप्त होता है। यही वजह है धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भी पूर्णिमा तिथि का मानव जीवन पर विशेष और सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

तो आइए जानते हैं वर्ष 2022 में पड़ने वाली पूर्णिमा की तिथियों की और पूर्णिमा व्रत से जुड़ी हर एक महत्वपूर्ण जानकारी

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पूर्णिमा 2022 कैलेंडर: आने वाली पूर्णिमा 2022 तिथि

हिंदू कैलेंडर में तिथियों को चंद्रमा की गति को आधार बनाकर निर्धारित किया जाता है। ऐसे में जिस दिन चंद्रमा अपने पूरे आकार में होता है उसे पूर्णिमा की तिथि कहा जाता है। पूर्णिमा का यह दिन भगवान विष्णु से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में बहुत से लोग पूर्णिमा के दिन अपने घरों में भगवान सत्यनारायण की कथा सुनते हैं, उनकी पूजा करते हैं और व्रत आदि भी करते हैं। ऐसा करने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख समृद्धि का आशीर्वाद बना रहता है। यहां हम आपको साल 2022 में आने वाली पूर्णिमा तिथि की विस्तृत सूची प्रदान कर रहे हैं।

पूर्णिमा व्रत तारीख़ दिन
पौष पूर्णिमा व्रत 2022 17 जनवरी 2022 सोमवार
माघ पूर्णिमा व्रत 2022 16 फरवरी 2022 बुधवार
फाल्गुन पूर्णिमा व्रत 2022 18 मार्च 2022 शुक्रवार
चैत्र पूर्णिमा व्रत 2022 16 अप्रैल 2022 शनिवार
वैशाख पूर्णिमा व्रत 2022 16 मई 2022 सोमवार
ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत 2022 14 जून 2022 मंगलवार
आषाढ़ पूर्णिमा व्रत 2022 13 जुलाई 2022 बुधवार
श्रावण पूर्णिमा व्रत 2022 12 अगस्त 2022 शुक्रवार
भाद्रपद पूर्णिमा व्रत 2022 10 सितंबर 2022 शनिवार
आश्विन पूर्णिमा व्रत 2022 09 अक्टूबर 2022 रविवार
कार्तिक पूर्णिमा व्रत 2022 08 नवंबर 2022 मंगलवार
मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत 2022 08 दिसंबर 2022 गुरुवार

पूर्णिमा तिथि के दिन व्रत रखने का विशेष महत्व बताया गया है। तो आइए जानते हैं पूर्णिमा तिथि के दिन व्रत रखने से व्यक्ति को किन फलों की प्राप्ति होती है और इस व्रत से जुड़ी अन्य जानकारियां और नियम क्या कुछ हैं।

पूर्णिमा 2022 तिथि का महत्व और नियम

किसी भी तरह की मनोकामना पूर्ति के लिए पूर्णिमा तिथि के दिन किया जाने वाला व्रत बेहद ही फलदाई और शुभ माना जाता है। सिर्फ इतना ही नहीं यदि व्यक्ति के जीवन में दुख कष्ट और परेशानियां हद से ज्यादा बढ़ गए हैं तो भी पूर्णिमा का यह व्रत करना उनके लिए फलदाई साबित हो सकता है। इसके अलावा पूर्णिमा का व्रत करने से व्यक्ति के अनजाने में भी हुए पाप दूर होते हैं। जानकारी के लिए बता दे पूर्णिमा का यह व्रत भगवान विष्णु के साथ-साथ माँ लक्ष्मी को भी समर्पित होता है। ऐसे में धन संपदा और सुख समृद्धि के लिए इस व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। बहुत सी जगहों पर पूर्णिमा किस दिन को पूरनमासी भी कहा जाता है। हिंदू धर्म में पूर्णमासी या पूर्णिमा के दिन कोई न कोई व्रत और त्योहार अवश्य पड़ता है।

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पूर्णिमा व्रत नियम: पूर्णिमा 2022 कैलेंडर के अनुसार पूर्णिमा के दिन किया जाने वाला व्रत सुबह सूर्योदय के बाद ही शुरू हो जाता है और रात में चंद्रमा को देखने के बाद ही पूरा होता है। इस दिन का व्रत करने वाले लोग भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और उनसे अपनी मनोकामना पूर्ति की और सौभाग्य का वरदान मांगते हैं।

चंद्रमा का धार्मिक महत्व

वैदिक ज्योतिष और धार्मिक महत्व के अनुसार चंद्रमा को व्यक्ति के मन का कारक माना गया है। ऐसे में चंद्रमा का सीधा प्रभाव व्यक्ति के मन पर पड़ता है इसलिए कहा जाता है कि, जो कोई भी व्यक्ति पूर्णिमा के दिन व्रत, पूजन, दान, पुण्य करता है ऐसे व्यक्तियों के मन पर चंद्रमा का अशुभ प्रभाव नहीं पड़ता है और ऐसे व्यक्ति को आरोग्य जीवन, धन संपदा, सुख समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

पूर्णिमा 2022 में व्रत के दौरान पूजन विधि

यह बात तो स्वाभाविक है कि, कोई भी व्रत और पूजा तभी फलदाई होती है जब उसे सही नियम और विधि पूर्वक किया जाए। ऐसे में पूर्णिमा 2022 कैलेंडर के अनुसार पूर्णिमा के दिन किया जाने वाले व्रत भी का भी नियम निर्धारित किया गया है। ऐसे में सलाह दी जाती है कि, यदि आप पूर्णिमा तिथि के दिन व्रत करने का विचार कर रहे हैं तो आपको इन नियमों का विशेष तौर पर पालन करना चाहिए।

  • पूर्णिमा के दिन जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी, घाट, तीर्थ स्थान पर स्नान करें। हालांकि यदि ऐसा मुमकिन नहीं है तो आप घर में ही स्नान के पानी में गंगाजल डालकर उससे स्नान कर सकते हैं। ऐसा करने से भी आपके सभी पाप दूर होते हैं। नहाते समय इस मंत्र का स्पष्ट उच्चारण पूर्वक जप अवश्य करें,

गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती !! नर्मदे सिंधु कावेरि जल अस्मिन्न सन्निधिं कुरु !!

  • स्नान करने के बाद, व्रत करना चाहते हैं तो व्रत का संकल्प लें और पूजा प्रारंभ करें। इस दिन की पूजा में भगवान शिव और भगवान विष्णु को शामिल करें। बहुत से लोग इस दिन सत्यनारायण की कथा भी सुनते हैं और उनकी पूजा भी करते हैं। ऐसे में यदि आपके लिए भी यह मुमकिन हो तो आप भी यह कर सकते हैं।
  • यदि आप पूर्णिमा का व्रत रख रहे हैं तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि, पूर्णिमा तिथि के दिन किया जाने वाला व्रत बिना कुछ खाए पिए किया जाता है। हालांकि विशेष मामलों में आप फलाहार खाकर भी व्रत कर सकते हैं। बस इस बात का ध्यान रखें कि, अन्न और नमक का सेवन बिल्कुल न करें।
  • यदि आप 2022 में आने वाली पूर्णिमा का व्रत कर रहे हैं तो इस बात का भी विशेष ध्यान रखें कि, सूर्योदय के साथ ही इस दिन का व्रत प्रारंभ हो जाता है और इसका समापन चंद्र दर्शन और चंद्रमा की पूजा के बाद ही होता है।
  • भोग की बात करें तो हिंदू धर्म में जो भी पूजा की जाती है उसमें हम देवी देवताओं को भोग अवश्य अर्पित करते हैं। ऐसे में पूर्णिमा के दिन मुख्य रूप से पंजीरी का भोग लगाने की परंपरा सालों से चली आ रही है। पंजीरी के अलावा आप भोग में पंचामृत भी अवश्य शामिल करें। पंचामृत दूध, गंगाजल, शहद, तुलसी के पत्ते और दही से मिलकर बनने वाला प्रसाद होता है।
  • पूर्णिमा के दिन यदि आपने व्रत किया है या व्रत करने के बारे में सोच रहे हैं तो आपको दिन में दो बार पूजा करनी है। एक तो सुबह और दूसरी शाम को चंद्रोदय के समय। इस दौरान स्नान करके दोबारा पूजा करें और चंद्र देवता से अपने जीवन में सुख समृद्धि की कामना करें।
  • शाम के समय पूजा करने के बाद आप चाहे तो हल्का भोजन करके अपने व्रत का समापन कर सकते हैं। अगले दिन पूजा करने के बाद जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को दान दक्षिणा अवश्य दें। कहा जाता है कोई भी व्रत तभी सिद्ध होता है जब इसका समापन के समय हम जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को दान पुण्य दे दें।

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पूर्णिमा के दिन पैदा हुए लोगों का स्वभाव

अब बात करते हैं ज्योतिष के अनुसार पूर्णिमा तिथि के दिन पैदा हुए लोगों के स्वभाव के बारे में, वैदिक ज्योतिष में पूर्णिमा के दिन पैदा हुए लोगों के बारे में अलग-अलग धारणाएं मिलती हैं। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि, पूर्णिमा का दिन देवी देवताओं के जन्म या फिर उनके अलग-अलग अवतारों के अवतरण से संबंधित माना गया है। ऐसे में पूर्णिमा के दिन को बेहद शुभ माना गया है और इस दिन पैदा हुए लोग बेहद ही भाग्यशाली माने जाते हैं। आगे बढ़ते हैं और जानते हैं ज्योतिष के विभिन्न दृष्टिकोण से पूर्णिमा के दिन पैदा होने वाले लोगों के बारे में ज्योतिषीय राय:

  • कहा जाता है पूर्णिमा के दिन पैदा हुए लोग चंचल स्वभाव के होते हैं। क्योंकि पूर्णिमा का दिन वह दिन होता है जिस दिन चंद्रमा अपने पूर्ण रूप में दिखाई देता है और चंद्रमा का सीधा संबंध व्यक्ति के मन से जोड़कर देखा जाता है और यही वजह है कि, ज्योतिषी मानते हैं कि पूर्णिमा के दिन जो लोग पैदा होते हैं वह स्वभाव में बेहद ही चंचल, बेहद संवेदनशील, और भावनात्मक स्वभाव के होते हैं।
  • इसके अलावा जो लोग पूर्णिमा के दिन पैदा होते हैं उनके सोचने, समझने और बात करने की क्षमता बेहद ही शानदार होती है। ऐसे में कई स्थितियों में ऐसा देखा गया है कि ऐसे लोग मध्यस्थता के लिए भी जाने जाते हैं। क्योंकि दूसरों की भावनाओं और बातों को समझ कर किसी दूसरे को समझाने का हुनर इनके अंदर बखूबी मौजूद होता है।
  • इसके अलावा ऐसे लोग सहानुभूति से परिपूर्ण भी होते हैं। ज्योतिष में चंद्रमा कल्पना, रचनात्मकता और अंतर्ज्ञान को सशक्त करने वाला ग्रह माना जाता है और यही वजह है कि पूर्णिमा के दिन पैदा हुए लोग अंतर्ज्ञानी, अंतर्दृष्टि और रचनात्मकता से भरे हुए होते हैं। इसके अलावा इन जातकों की यही खूबी उन्हें जीवन में सफलता दिलाती है, काम में उच्च और शीर्ष पद दिलाती है और हर एक मुकाम पर पहुंचने में मददगार साबित होती है।
  • इसके अलावा जो लोग पूर्णिमा के दिन पैदा होते हैं वह बेहद ही आकर्षक व्यक्तित्व के और सुंदर होते हैं। ऐसे लोगों को जीवन में हर एक क्षेत्र में सफलता मिलती है, धन-धान्य मिलता है, और उनका जीवन सुख समृद्धि से भरा रहता है।
  • इनके अलावा पूर्णिमा के दिन पैदा होने वाले लोग अन्य लोगों के साथ उचित समझ बनाकर काम करने में भी बेहद माहिर होते हैं। उनकी यही खासियत उन्हें भीड़ में सबसे अलग बनाती है और लोग उनकी बात भी जल्दी समझ जाते हैं।

पूर्णिमा तिथि से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण बातें

  • 2022 में पूर्णिमा व्रत का महत्व क्या होता है?

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा का दिन बेहद शुभ माना गया है। ऐसे में इस दिन पूजा करने और व्रत करने के ढेरों शुभ प्रभाव भी बताए गए हैं। बहुत से लोग इसी मान्यता के चलते पूर्णिमा के दिन व्रत करते हैं और सत्यनारायण की पूजा भी करते हैं। कहा जाता है इससे व्यक्ति को जीवन में अच्छे और निरोगी स्वास्थ्य, सुखी जीवन, और समृद्ध जीवन की प्राप्ति होती है। इसके अलावा पूर्णिमा व्रत 2022 केवल पूर्णिमा तिथि तक ही सीमित नहीं माना जाता है। बल्कि कई विशेष अवसरों और महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठानों से पहले भी यह पूजा की जाती है। उदाहरण के तौर पर समझाएं तो कई लोग शादी से पहले, अपने नए घर में प्रवेश करने से पहले, या फिर जीवन में कोई भी नया या बड़ा काम पूरा करने और शुरू करने से पहले पूर्णिमा 2022 की पूजा या व्रत कथा करते और सुनते हैं।

कहा जाता है पूर्णिमा 2022 का व्रत और उपवास पूरी निष्ठा, ईमानदारी और नियम के साथ किया जाए तो इससे व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। इस व्रत को करने से व्यक्ति का मन और शरीर में सुकून और शांति मिलती है और शुभ परिणाम की प्राप्ति होती है। यानी कि कुल मिलाकर देखा जाए तो पूर्णिमा तिथि के दिन की जाने वाली पूजा और व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को ढेरों सकारात्मक प्रभाव, आरोग्य जीवन, सुख समृद्धि, धन-धान्य आदि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

  • पूर्णिमा तिथि के दिन की जाने वाली पूजा में किन मंत्रों का जाप करना होता है फलदाई?

पूर्णिमा तिथि के भगवान विष्णु, महालक्ष्मी की पूजा आदि की जाती है। प्रसन्न होने पर यह देवी देवता आपको जीवन में आरोग्य स्वास्थ्य, धन समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। इसके अलावा इस दिन की पूजा में कुछ विशेष मंत्रों को शामिल करने का भी विशेष महत्व बताया गया है। आइए जानते हैं कौन से हैं वह मंत्र और क्या है इनका लाभ।

पहला है महामृत्युंजय मंत्र: महामृत्युंजय मंत्र को बेहद शुभ माना जाता है ऐसे में यदि आपको अपने जीवन में भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करना हो या उनकी प्रसन्नता हासिल करनी हो तो पूर्णिमा तिथि के दिन की जाने वाली पूजा में इस मंत्र को अवश्य शामिल करें। इस मंत्र का स्पष्ट उच्चारण पूर्वक जाप करें।

ॐ त्र्यम्बकम् यजामहे सुगन्धिम् पुष्टिवर्धनम् ।

उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ।।

दूसरा है महामंत्र का जाप: कहा जाता है यदि पूर्णिमा के दिन महामृत्युंजय मंत्र या महामंत्र का जाप कर लिया जाए तो इससे व्यक्ति को अपने जीवन में मौजूद हर एक समस्या, परेशानी से छुटकारा मिलता है। ऐसे में यदि आप भी पूर्णिमा तिथि के दिन व्रत करने का विचार कर रहे हैं तो इस दिन की पूजा में इस मंत्र को अवश्य शामिल करें।

“हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे

हरे राम हरे राम , राम राम हरे हरे !!

इन दोनों मंत्रों या इनमें से किसी भी एक मंत्र के अलावा आप चाहे तो पूर्णिमा के दिन की जाने वाली पूजा में मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए श्री सूक्त का पाठ भी कर सकते हैं। इससे भी आपको आर्थिक लाभ और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होगी। जानकारी के लिए बता दें कि, नवरात्रि में हम मां दुर्गा के जिन नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं उनमें से महागौरी देवी को चंद्रमा से संबंधित मना किया है। ऐसे में पूर्णिमा तिथि के दिन मां महागौरी की पूजा करने से भी आपको विशेष फल की प्राप्ति हो सकती है।

  • पूर्णिमा 2022 का महत्व क्या है?

पूर्णिमा 2022 भगवान विष्णु के विभिन्न स्वरूपों से संबंधित तिथि मानी गई है। ऐसे में स्वाभाविक है कि इस तिथि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व होता है। यही वजह है कि इस दिन बहुत से लोग स्नान, दान करते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं पूर्णिमा का यह दिन किसी भी नए काम की शुरुआत के लिए बेहद शुभ माना गया है। पूर्णिमा तिथि के दिन की जाने वाली पूजन और उपवास भारत के उत्तरी हिस्सों में ही नहीं बल्कि दक्षिणी हिस्सों में भी बेहद ही हर्षोल्लास और आस्था के साथ मनाया जाता है। भारत के दक्षिणी हिस्से में इस दिन को देवी गायत्री के स्मरण के रूप में मनाया जाता है। दक्षिणी हिस्से में पूर्णिमा का यह दिन पूरणमणि व्रतम के नाम से मनाया जाता है। इसके अलावा आषाढ़ पूर्णिमा 2022 को गुरु पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन न केवल पारंपरिक वैदिक परिवारों में यह दिन बेहद ही भक्ति भाव के साथ मनाया जाता है बल्कि बौद्ध और जैन धर्म के अनुयायी भी इस दिन को बेहद ही श्रद्धा भाव के साथ मनाते हैं।

पूर्णिमा तिथि से संबंधित एक प्रमुख बात के तौर पर यह कहा जाता है कि, चंद्रमा इस दिन पृथ्वी का अपना चक्र पूरा करके अपनी मूल बिंदु पर जिस प्रकार वापस पहुंचता है उसी तरह इंसानों को भी अपने अंदर की किसी भी तरह की नकारात्मकता को दूर करके पूर्णिमा तिथि से नए सिरे की शुरुआत करनी चाहिए। ऐसे में इस दिन हर एक इंसान को पूजा, तपस्या करनी चाहिए और स्वस्थ जीवन, जीवन में धन संपदा, सुख समृद्धि प्राप्त करने के लिए भगवान विष्णु भगवान की प्रार्थना करनी चाहिए।

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